स्वास्थय रहने की कुंजी | How to stay healthy forever 15 Essential things to follow

स्वास्थय रहने की कुंजी

वर्तमान समय में जिंदगी तेज रफ़्तार से चल रही है। लोगो का अपने स्वास्थय से धयान हट गया है, परन्तु अभी भी जीवन शैली व खान-पान में बदलाव से कई रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। घरेलू वस्त के उपयोग से शरीर तो स्वस्थ रहेगा ही बीमारी पर होने वाला खर्च भी बचेगा ।

कृपया इनका अवश्य ध्यान रखें।

  •  प्रातःकाल जल्दी उठकर खुली हवा में व्यायाम या शरीर श्रम अवश्य करे।
  • भोजन के तुरंत बाद अधिक तेज अधिक चलना या दौड़ना हानिकारक है।इसलिए कुछ देर आराम करके ही जाना चाहिये।
  • खाना-खाने या घी, तेल की चीजें खाने के बाद तुरंत पानी नहीं पीना चाहिये।एक-डेढ़ घण्टे के बाद पानी पीना चाहिये।
  • शौच जाने के तुरंत बाद, शारीररक मेहनत करने के बाद या तेज धूप में चलने बाद पानी कभी नहीं पीना चाहिये।
  •  सिर पर कपड़ा बांधकर या पैरों मे मोजे पहनकर कभी – भी नहीं सोना।
  • पानी घुट-घुट कर ताकि जयदा से जयदा लार (saliva)अन्दर जा सके। इससे पेट तटस्थ(neutral) रहता है
  • फलों का रस, अत्यधिक तेल की चीजें , मट्ठा, खट्टी चीजें रात में नहीं खानी चाहिये।
  • शाम को भोजन के बाद शुद्ध हवा में टहलना चाहिये खाने के तुरंत बाद सो जाने से पेट की गड़बडियाँ हो जाती हैं।
  • केवल शहद और घी बराबर मात्रा में मिलाकर नहीं खाना चाहिये वह एक विष हो जाता है।
  • खाने पीने में  विरोधी पदाथों को एक साथ नहीं लेना चाहिये जैसे दूध और कटहल, दूध और दही, मछली और दूध आदि चीजें एक साथ नहीं लेनी चाहिये।इससे पेट की गड़बडियाँ हो जाती हैं।
  • बहुत तेज या धीमी रोशनी में पढ़ना ,अत्यधिक टीवी या सिनेमा देखना अत्यधिक गर्म – ठंडी  चीजों का सेवन करना,  अत्यधिक गर्म मसालों का प्रयोग करना , तेज धूप में चलना , इन सबसे जहा तक हो सके तो बचना चाहिये। यदि  तेज धूप में चलना ही पड़े तो भी  सर और कान पर कपड़ा बांधकर ही चलना चाहिये।
  • रोगी को हमेशा  गर्म अथवा गुनगुना पानी ही पीना चाहिये।और रोगी को ठंडी हवा,परिश्रम , तथा क्रोध से बचना चाहिये।
  •  आयुर्वेद में लिखा है निद्रा से पित शांत होता है, मालिश से वाय कम होती है,उल्टी से कफ कम होता है और लुंघन करने से बुखार शांत होता है।इसलिए  घरेलू  चिकित्सा करते समय इन बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिये।
  • आग या किसी गर्म चीजों से जल जाने पर जले भाग को ठुंडे पानी में डालकर रखना चाहिये।
  • किसीभी भी रोगी को तेल, घी या  अधिक चिकने पदाथों के सेवन से बचना चाहिये।

Source – Astanga Hrdayam https://archive.org/details/AstangaHrdayam_Hindi

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धन्यवाद

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